क्या दमोह उपचुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया की जरूरत नहीं, उठ रहें हैं ये सवाल?

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भाजपा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया (फाइल फोटो)

दमोह। दमोह विधानसभा की सीट कांग्रेस और भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का मुद्दा बन गई हैं। कांग्रेस की कोशिश इस सीट पर अपना कब्ज़ा फिर से बरकरार रखने की है, तो वहीं बीजेपी इसे फिर से इसे वापिस लेना चाहती हैं। कांग्रेस विधायक राहुल सिंह लोधी के इस्तीफे से खाली हुई दमोह विधानसभा सीट पर 17 अप्रैल को उपचुनाव होने जा रहे हैं। 


इस उपचुनाव (By-Election) में बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, बीजेपी के द्वारा स्टार प्रचारकों (Star Campaigners) की लिस्ट भी जारी कर दी गई है, लेकिन दमोह विधानसभा (Damoh Assembly) के इस पूरे चुनावी सीन से भाजपा के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) गायब हैं।


पॉलिटिकल पंडित इस पर सवाल उठा रहे हैं, उनका मानना है, कि दमोह उपचुनाव में सिंधिया जैसे प्रदेश के दिग्गज और कद्दावर नेता की क्या पार्टी को कोई जरूरत नहीं है या फिर सोची-समझी रणनीति के तहत इस चुनावी मैदान से बाहर रखने के इरादे से ही सिंधिया को पश्चिम बंगाल में चौथे चरण के प्रचार की कमान सौंपी गई है.


पोस्टर बेनर से गायब सिंधिया:


वहीं दमोह उपचुनाव (Damoh By-Election) में अब तक ज्योतिरादित्य सिंधिया का चेहरा नजर नहीं आया है, यहां तक पोस्टर बैनरो से भी वह गायब है, सिंधिया की कोई सभा, रैली का अब प्लान नही बना है। आपको बता दे कि 2 दिन बाद उन्हें भोपाल व ग्वालियर आना है फिर भी उनका दमोह का दौरा नहीं हैं। भाजपा में आने के बाद से सिंधिया की उपेक्षा से कांग्रेस सवाल उठाती रही हैं। 


सिंधिया का बुंदेलखंड में दखल नहीं चाहते भाजपा नेता:


सूत्रों के मुताबिक बुंदेलखंड के कई भाजपा नेता बुंदेलखंड में सिंधिया का दखल नहीं चाहते, शायद इसी कारण से सिंधिया को  इस चुनाव से दूर रखा गया हैं। सिंधिया दसवें नंबर के स्टार प्रचारक जरूर हैं, लेकिन मौजूदा समीकरणों के तहत उनका चुनाव में सक्रिय ना होना मुश्किल दिख रहा हैं। 


आपको बता दें कि बुंदेलखंड से भाजपा में कई कद्दावर नेता है इसमें केंद्रीय राज्य मंत्री प्रहलाद पटेल, प्रदेश के मंत्री गोपाल भार्गव और भूपेंद्र सिंह शामिल हैं। लेकिन अपने 2 दर्जन विधायकों, मंत्रियों के साथ दल बदलकर  कमलनाथ की सरकार गिराने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया नदारद हैं।

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