प्राइवेट स्कूलों द्वारा फ़ीस वसूली मामले में मध्यप्रदेश सरकार समेत CISCE,CBSE और स्कूल एसोसिएशन को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस!

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इंदौर। कोरोना काल के दौरान वसूली गई स्कूल फीस (School fees) का मामला अब जारी नोटिस के साथ सीधा सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचा है नोटिस CISCE (इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन काउंसिल के लिए), मध्य प्रदेश राज्य सरकार, CBSE (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) और Association of Unaided CBSE Schools​ के पास पहुंच गया है। जागृत पलक संघ, इंदौर (Jagrut Palak Sangh, Indore) द्वारा दायर इस याचिका में अगली सुनवाई 3 सप्ताह के बाद होगी।

माता-पिता ने कोरोना महामारी (Corona Pandemic) की भारी समस्या के दौरान स्कूलों द्वारा वसूले गए अनुचित शुल्क के खिलाफ SC में याचिका दायर की है याचिका में कहा गया है कि उस समय केवल ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित की जाती थीं, कहीं- कही तो वे भी नहीं हुई! फ़िर किस बात की अनुचित फीस वसूली जा रही हैं। 

आपको बता दें इससे पहले, जबलपुर हाईकोर्ट की खंडपीठ में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई थी। जिसपर हाईकोर्ट ने फैसला दिया था कि स्कूलों द्वारा ट्यूशन फीस (tuition fee) वसूली की जा सकती है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अभिभावकों द्वारा सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया जा रहा हैं।

सुप्रीम कोर्ट (Supereme Court) सुनवाई में, संघ के सचिव सचिन माहेश्वरी के साथ याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील मयंक क्षीरसागर ने कुछ निजी स्कूलों की फीस रसीदें अदालत के सामने पेश कीं। प्रतिनिधियों ने कहा कि स्कूलों में शिक्षण शुल्क के तहत पूरी फीस ली जा रही है। संघ के अध्यक्ष एडवोकेट चंचल गुप्ता ने कहा कि याचिका में मांग की गई थी कि उचित ट्यूशन फीस निर्धारित करने के लिए उच्च न्यायालय (Jabalpur Highcourt) की निगरानी में एक समिति का गठन किया जाए।

फीस को लेकर अभिभावक स्कूल शिक्षा मंत्री से मिले: 

छात्रों के लिए केवल ऑनलाइन कक्षाएं (Online Classes) प्रदान करते हुए भी पूरी फीस वसूलने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के माता-पिता ने भी स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री से मिलकर राहत की मांग की है।

बैठक के बाद, मंत्री ने उन्हें शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मिलने के लिए कहा। इसके अलावा, जैसा कि निर्णय लिया गया और बैठक में निर्देश दिया गया, शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी निजी स्कूलों को नोटिस जारी किया है।

विभाग ने कहा कि अगर किसी बच्चे की फीस जमा नहीं की जाती है, तो भी निजी स्कूल उन्हें ऑनलाइन कक्षाओं या परीक्षाओं से वंचित नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा, इसमें कहा गया है कि जिन स्कूलों की शिकायतें मिली हैं, उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, फीस के संबंध में, उच्च न्यायालय और सरकार द्वारा पहले ही आदेश जारी किए जा चुके हैं कि एकमुश्त फीस अभिभावकों से नहीं ली जाएगी। साथ ही, केवल शैक्षणिक शुल्क  ही लिया जाएगा। इसके बावजूद निजी स्कूल अभिभावकों पर एकमुश्त फीस देने का दबाव बना रहे हैं। अभिभावकों ने इंदौर जिले के दो-तीन निजी स्कूलों के खिलाफ भी सी-ऑल्टर की शिकायत की थी।

निजी स्कूलों के खिलाफ लगभग 400 शिकायतें: 

कोरोनाकाल और लॉकडाउन (lockdown) के बाद, निजी स्कूलों के खिलाफ लगभग 400 शिकायतें फीस के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी और मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग को मिली हैं। कोरोना अवधि के बाद से शासन द्वारा कई आदेश जारी किए गए हैं, लेकिन अभी भी माता-पिता परेशान हैं कि निजी स्कूल (Private School) के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

केके द्विवेदी, निदेशक, डीपीआई (सार्वजनिक निर्देश निदेशालय), ने कहा “हमें अभिभावक संघों से कई शिकायतें मिली हैं और अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी बच्चा शुल्क भुगतान के अभाव में ऑनलाइन शिक्षा से वंचित न रहे। जिला शिक्षा अधिकारियों को इस मामले की जांच करने और स्थिति को स्पष्ट करने का आदेश दिया गया है।

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