कैलाश विजयवर्गीय और नरोत्तम मिश्रा के बीच बंद कमरे में 1 घंटे तक हुई चर्चा सियासी गलियारे में मची हलचल

kailash vijayvargiya and narottam mishra
कैलाश विजयवर्गीय और एमपी के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा


भोपाल। बीजेपी  के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) और मध्‍य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) के बीच बंद कमरे में लगभग 1 घंटे तक चली चर्चा से अब सियासी गलियारे में हलचल तेज़ हो गई है। इस मुलाकात के बाद कई मायने निकाले जा रहे हैं। पॉलिटिकल पंडित इसको लेकर केलाश विजयवर्गीय की मध्यप्रदेश में सक्रियता की बात बता रहे हैं और कई नए समीकरण बनने की चर्चा भी जता रहे है। वहीं, इसके पूर्व सीएम और पीसीसी चीफ कमलनाथ के पास हनी ट्रैप केस (Honey Trap Case) की पेन ड्राइव को भी इसी सियासत से जोड़कर भी देखा जा रहा है।


राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पश्चिम बंगाल के चुनाव के बाद अब मध्यप्रदेश में विजयवर्गीय अपनी सक्रियता को बढ़ाने के साथ प्रदेश की सियासत के नए समीकरण को गिनने का काम कर रहे हैं. आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी रणनीति तैयार की जा रही है। इतना ही नहीं, कमलनाथ के पास हनीट्रैप की पेन ड्राइव के मामले में भी अब कई सियासी चर्चाएं चलने लगी हैं।


मुलाक़ात के बाद कैलाश विजवर्गीय ने कही ये बात:


कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जहां जाते हैं वहां राजनीतिक तो चर्चा तो होती है, ये सामान्य चर्चा है. कोई नया समीकरण नहीं है. मध्‍य प्रदेश में सक्रियता बढ़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कल मैं मध्‍य प्रदेश में 6 महीने बाद आया हूं. हमारे बहुत सारे मित्र चले गए उनके परिवार में बैठने आया हूं. जबकि कमलनाथ के पेन ड्राइव मामले पर उन्होंने कहा कि कमलनाथ से पूछिए उनके पास पेन ड्राइव है।


गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सहज मुलाक़ात बताया:


कैलाश विजयवर्गीय से मुलाकात पर नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि हमारी ये सहज मुलाकात थी. इसको राजनैतिक चश्मे से न देखें. कोरोना को लेकर उन्होंने कहा कि खंडवा में कोई भी प्रकरण नहीं आये हैं. डिंडोरी जिला भी शून्य आ गया है. इस समय मध्‍य प्रदेश के 10 जिलों में दस से कम प्रकरण आ रहे हैं. कोरोना कर्फ्यू में जनता ने अच्‍छा सहयोग दिया है. आगे भी सावधानी रखनी होगी. जनता को खुद रोको टोको अभियान चलाना चाहिए. इसके साथ तीसरी लहर के लिए प्रदेश सरकार पूरी तरह से तैयार है. कोरोना काल में पुलिस का अलग चेहरा सामने आया है, जब सड़कें वीरान थीं तब हमारी पुलिस सड़कों पर थी।

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